हिंदी उर्दू में एक शब्द है ठग, जो अब अंग्रेजी में भी अपना स्थान बना चुका है। ठग शब्द को संस्कृत की √स्थग् धातु से निष्पन्न माना जाता है। √स्थग् से विशेषण बनता है स्थग, जिसका अर्थ है जालसाज, धूर्त, बेईमान, छली निर्लज्ज Fraudulent, dishonest, a rogue, a cheat। ठग शब्द सुनते ही लोगों के दिमाग़ में चालाक और मक्कार आदमी की तस्वीर उभरती है जो झाँसा देकर कुछ कीमती सामान ठग लेता है। शब्द रत्नावली के अनुसार “धूर्तो स्थगश्च निर्लज्जः पटुः पाटविकोऽपि च ॥ ” व्युत्पत्ति की दृष्टि से स्थगन, स्थगित शब्द भी इसी 'ठग, के भाई-बंधु हैं। ठगी, धोखाधड़ी, लूटपाट, हत्या जैसे काम करना ही ठगों का पारंपरिक व्यवसाय रहा है। इनकी विशेष कार्य स्थली गंगा-यमुना का दोआबा माना जाता था, किन्तु अन्यत्र भी इनकी धूम रही है। अंग्रेजों के ज़माने में भी इनको जरायमपेशा (अपराध वृत्ति के) माना जाता था। भारत में 19-वीं सदी में जिन ठगों से अंग्रेज़ों का पाला पड़ा था, वे कोई मामूली लोग नहीं थे। ठगों के बारे में सबसे दिलचस्प और प्रामाणिक जानकारी 1839 में छपी पुलिस सुपरिटेंडेंट फ़िलिप मीडो टेलर की पुस्तक 'कनफ़ेशंस ऑफ़ ए ठग...
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||वागर्थाविव सम्पृक्तौ वागर्थ प्रतिपत्तये ||
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