खी-खी के बहाने हाहा-हूहू, ही-ही या खी-खी के बहाने किसी की खिल्ली उड़ाना ठीक नहीं। हिंदी में ये सभी विस्मय, आनंद, आमोद आदि मनोभावों को बताने वाले अव्यय हैं। इनका व्यावहारिक प्रयोग और उचित संदर्भ समझ लेना ज़रूरी है। अमरकोश के अनुसार "हाहा हूहू" गंधर्वों को कहा जाता है जो देवयोनि में माने जाते हैं। वे अपने क्रियाकलापों से देवताओं को प्रसन्न रखते हैं। "हाहा हूहूश्चैवमाद्या गन्धर्वास्त्रिदिवौकसाम्।" ~अमरकोश 'हा-हा' पीड़ा, शोक या आश्चर्य का प्रकट करने वाला उद्गार है। हिंदी शब्दकोशों के अनुसार हाहा-हूहू ऊधम बाज़ी, हो-हल्ला, शोरगुल को व्यक्त करता है। हा-हा उन्मुक्त अट्टहास के लिए भी है तथा शोक और कष्ट व्यक्त करने के लिए भी। 'ही-ही' भी अव्यय है। आप्टे के अनुसार ही+ही आश्चर्य और प्रमोद को प्रकट करने वाला अव्यय है। रही बात खी-खी की। यह अनुकरणात्मक शब्द है जो हँसने की विशेष रूप से अप्रिय और चुभने वाली आवाज़ का संकेत करता है। 'खि' और 'खी' से अर्थ संकेत में बड़ा अंतर आया है। जैसे खिलखिलाना, खिलखिलाहट (कुमाउँनी में खितखिताट) में त्वरित और उन्मु...
साध्वी चर्चा आजकल धार्मिक चोले के साथ राजनीति करने वाली अनेक स्त्रियाँ अपने नाम के आगे 'साध्वी' विशेषण जोड़ती हैं। X (पूर्व ट्विटर) पर एक अनुसारक ने पूछा– क्या साध्वी शब्द का संबंध सधवा, विधवा से है? क्या इन शब्दों का मूल एक है? समाधान में कहना पड़ा– नहीं, ऐसा नहीं है। संस्कृत में 'धव' का अर्थ है पति। विधवा का अर्थ हुआ जिसका 'धव' न हो अर्थात जो पति से रहित हो गई है; और विधवा का विलोम शब्द 'सधवा' अर्थात पति सहित नारी, जिसे सौभाग्यवती भी कहा जाता है। साध्वी साधु से बना स्त्रीलिंग (साधु+ ई) सर्वथा भिन्न शब्द है। अमरकोश के अनुसार 'साध्वी' पतिव्रता को कहा जाता है। पतिव्रता की व्याख्या अनेक पुराणों, स्मृतियों और कोश ग्रंथों में भिन्न-भिन्न प्रकार से की गई है। आज की भाषा में कहें तो सब परिभाषाओं के पीछे पुरुषवादी दृष्टिकोण है; जैसे हारीत स्मृति की यह परिभाषा देखिए— "आर्त्तार्त्ते मुदिता हृष्टे प्रोषिता मलिना कृशा। मृते म्रियेत या पत्यौ साध्वी ज्ञेया पतिव्रता॥" अर्थात जो स्त्री पति के दुखी होने पर दुखी, सुखी होने पर प्रसन्न, पति के परदेस जा...