सदृश [विशेषण] जो देखने में किसी व्यक्ति, पदार्थ-जैसा हो (समान इव दृश्यतेऽसौ)। एक रूप-रंग का, समान, अनुरूप, तुल्य, बराबर, उपयुक्त। (like, resembling, similar to) सदृश्य (दृश्य सहित) कोई प्रचलित शब्द नहीं है– न हिंदी में, न संस्कृत में। सादृश्य (सदृशस्य भावः, संज्ञा) भिन्न है। अर्थ है- दो अलग-अलग वस्तुओं या अवधारणाओं के बीच तुलना में समानता या समरूपता का भाव (analogy)। मिलता-जुलतापन, संगति, बराबरी (likeness, resemblance, similarity). सादृश्यता उपयुक्त प्रयोग नहीं है, सादृश्य पर्याप्त है। सादृश्य पहले ही भाववाचक संज्ञा है। 'ता' प्रत्यय जोड़कर उसे दुबारा भाववाचक बनाने की आवश्यकता नहीं है। ♦️
एक संदेह प्रायः दिखाई पड़ता है कि अचानक अदृश्य होना, ओझल होना के लिए अंतर्धान है या अंतर्ध्यान ? उत्तर है अंतर्धान, (अन्तर्+ √धा+ ल्युट्) दृष्टिगोचर न होना, छिप जाना, लोप हो जाना, न दिखाई पड़ना; disappearance, invisibility। अमरकोश में भी अंतर्धान का यही अर्थ है। "अन्तर्धानं तिरोधाने दृश्यपदार्थस्य दर्शनायोग्यस्थाने स्थितौ, मुन्यादीनां शरीरत्यागे च।" दिखाई देने वाली वस्तु अदृश्य स्थान पर हो जाए तो अंतर्धान होना कहलाता है। ऋषि-मुनियों के शरीर त्याग को भी अंतर्धान होना माना जाता है। रामायण में, अन्यत्र भी, न दिखाई पड़ने की स्थिति के लिए अंतर्धान शब्द ही मिलेगा। ध्यान (√ध्यै+ल्युट्) है किसी पदार्थ, भाव को मन में उपस्थित करने की क्रिया। इसलिए अंतर्ध्यान (अंतर्+ध्यान) भीतर की ओर उन्मुख ध्यान, inward meditation को कहा जाएगा। यही मानसिक अवधान (meditation) है। अंतर्ध्यान कोई प्रचलित शब्द नहीं है। भ्रमवश अंतर्धान को ही अंतर्ध्यान लिखते/बोलते हैं। ♦️