कढ़ी एक लोकप्रिय और पारंपरिक भारतीय व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से बेसन, दही या छाछ और विभिन्न मसालों के साथ पकाकर तैयार किया जाता है। कढ़ी पकाने की विधि सरल होने और इसके तीखे और चटपटे स्वाद के कारण यह बहुत लोकप्रिय व्यंजन है। (फोटो साभार: विकीपीडिया) कढ़ी की व्युत्पत्ति बड़ी रोचक है। इसका संबंध वैद्यक वाले काढ़े से है। संस्कृत में √क्वथ् धातु का अर्थ है उबालकर गाढ़ा करना। क्वथ् से ही बनता है 'क्वाथ' (काढ़ा, डिकॉक्शन)। क्वथ् से क्त प्रत्यय जोड़कर कृदंत विशेषण क्वथित– (उबालकर गाढ़ा किया हुआ)। संस्कृत क्वथित > प्राकृत कढित> कढ़िय> हिंदी कढ़ी। नेपाली और कुमाउँनी में ढ़ को ड़ बोलने से 'कड़ी'। कुमाऊँ में कहीं-कहीं 'कढ़ी' ('कड़ी') को ग्राम्य अपशब्द (टैबू) माना जाता है, इसलिए इसे वैकल्पिक नाम दिए गए हैं – झोली (झोई) और पयो! झोली, झोल (अर्थात् रस, तरी, ग्रेवी) से है और पयो संस्कृत पय से (√पीङ्, पीयते यत्, जिसे पिया जाए)। हिंदी में प्रचलित कढ़ी से जुड़े कुछ प्रमुख मुहावरे और उनके अर्थ नीचे दिए गए हैं: * कढ़ी का सा उबाल: इसका अर्थ है ऐसा जोश, क्...
शब्द विवेक #साधो_शब्दविचारो कड़ाही, कड़ाई, कढ़ाई 🧿 कड़ाही – सं कटाह> प्रा कडाह > हिं कड़ाह> स्त्रीलिंग कड़ाही। *लोहे की कड़ाही। *जलेबी की कड़ाही। 🧿 कढ़ाई– काढ़ना क्रिया का भाव —> कढ़ाई। कपड़े पर सुई-धागे से की जाने वाली सजावटी सिलाई। * लखनऊ का 'चिकन वर्क' एक प्रकार की कढ़ाई है। मूल शब्द न जानने के कारण 'कड़ाही' को भी 'कढ़ाई' कहा जाने लगा है। जैसे–कढ़ाई पनीर (पनीर के टुकड़ों पर कढ़ाई का डिज़ाइन ज़रूर देखिएगा!) 🧿कड़ाई – सं कड्ड (कठोर, कर्कश) से हिंदी विशेषण कड़ा, कड़ा होने का भाव कड़ाई। * कड़ाई से पेश आना।