Arushi किसी नाम पर इन मंचों में प्रायः चर्चा होती है। मुझे भी लोग संदेश से पूछते हैं। मेरा सदा यह मानना है कि बच्चे का नामकरण उसके माता-पिता का परमाधिकार है, और अपना नाम नामधारी की निजी संपत्ति होती है। आजकल देश में प्रायः सर्वत्र ही संस्कृत के नामों की ओर विशेष रुझान देखा जाता है, किंतु व्युत्पत्ति ज्ञात न होने, या भ्रामक व्युत्पत्ति से कभी-कभी अनाम भी संस्कृत नाम मान लिए जाते हैं। इधर 'आरुषि' नाम बहुत चल रहा है, आज भी किसी ने पूछा है। दरअसल हिंदी-संस्कृत में "आरुषि" शब्द नहीं है। शब्द न होना कोई चिंता की बात नहीं है, जीवित भाषाओं में शब्द भंडार बढ़ता रहता है। रुचि के अनुसार कुछ भी नाम रखा जा सकता है। व्याकरण शास्त्र भी कहता है कि नाम और ग्राम की व्यत्पत्ति नहीं देखी जाती। उनका होना ही सिद्ध होना है। अब आरुषि पर। संस्कृत में √रुष् हिंसायाम् धातु मारने, रूठने, क्रुद्ध होने (to kill, to destroy) के अर्थ में है। इससे आ उपसर्ग जोड़कर "आरुष्" बनता है, जिसका अर्थ है– बहुत क्रुद्ध (excessively furious) होना। पुराणों के अनुसार अरुषी/आरुषी (= क्रोधी) मनु की ए...
गधा संस्कृत में एक धातु है √गर्द (शोर करना, चीखना-चिल्लाना) उससे अभच् प्रत्यय जुड़कर बनता है गर्दभ। गर्दभ > गधा (गदहा)। एक सीधा-सादा पशु, donkey, ass. लाक्षणिक अर्थ: मूर्ख, भोला, simpleton, stupid. अविश्रामं वहेद्भारं शीतोष्णञ्च न विन्दति ससन्तोषस्तथा नित्यं त्रीणि शिक्षेत गर्दभात्॥ ~चाणक्य "बिना विश्राम किए भार वहन करना, सर्दी-गर्मी की चिंता न करना, सदा संतुष्ट रहना, ये तीन बातें गधे से सीखनी चाहिए।" गधे अनुशासित होते हैं और अपने काम को लेकर बहुत सजग रहते हैं। गधों की याददाश्त बहुत अच्छी होती है, वे रास्तों को आसानी से याद रख सकते हैं। कहते हैं कि रेखागणित का एक प्रमेय गर्दभानंद ने सिद्ध किया था — त्रिभुज की दो भुजाओं से तीसरी छोटी होती है। [चित्र कच्छी गधा (गुजरात), सौजन्य @विकी कॉमंस] गुजरात में दो विशिष्ट नस्लों के गधे मिलते हैं - हलारी गधा और कच्छी गधा। दोनों ही नस्लें गुजरात के पारंपरिक पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। 🫏🫏🫏