शब्द विवेक #साधो_शब्दविचारो कड़ाही, कड़ाई, कढ़ाई 🧿 कड़ाही – सं कटाह> प्रा कडाह > हिं कड़ाह> स्त्रीलिंग कड़ाही। *लोहे की कड़ाही। *जलेबी की कड़ाही। 🧿 कढ़ाई– काढ़ना क्रिया का भाव —> कढ़ाई। कपड़े पर सुई-धागे से की जाने वाली सजावटी सिलाई। * लखनऊ का 'चिकन वर्क' एक प्रकार की कढ़ाई है। मूल शब्द न जानने के कारण 'कड़ाही' को भी 'कढ़ाई' कहा जाने लगा है। जैसे–कढ़ाई पनीर (पनीर के टुकड़ों पर कढ़ाई का डिज़ाइन ज़रूर देखिएगा!) 🧿कड़ाई – सं कड्ड (कठोर, कर्कश) से हिंदी विशेषण कड़ा, कड़ा होने का भाव कड़ाई। * कड़ाई से पेश आना।
सांसारिक मोह-माया का, कर्तव्यों और आग्रहों का पूर्ण परित्याग करके स्वयं को ईश्वर या उच्च उद्देश्य के प्रति समर्पित करने की स्थिति को इन तीन शब्दों में से क्या कहा जाए, यह प्रश्न है। (फोटो साभार X, पूर्व ट्विटर से) संलग्न चित्र में विशेषज्ञ वक्ता का निर्णय स्पष्ट है। कार्यक्रम का नाम "ज़िद" (हठ) सर्वथा उपयुक्त है। इस बात का हठ कि जो हम कहें वही ठीक। भाषा के अपने नियम होते हैं, वहाँ ज़िद नहीं चलती। "संन्यास" ठीक है, और "सन्न्यास" भी। हिंदी में संन्यास अधिक प्रचलित है। कैसे? आइए, जानें। संस्कृत व्याकरण में एक सूत्र है "मोऽनुस्वारः", यह म् के बाद व्यंजन होने पर म् को अनुस्वार करता है । इस सूत्र से सम्+न्यास को 'संन्यास' हुआ। अब सं+न्यास को "अनुस्वारस्य ययि परसवर्णः" (अनुस्वार को वर्गीय व्यञ्जन परे होने पर परसवर्ण अर्थात बाद वाले वर्ण का पंचमाक्षर) सूत्र से परसवर्ण हुआ तो सन्न्यास हुआ। अब "वा पदान्तस्य" (पदान्त के अनुस्वार को वर्गीय व्यञ्जन परे होने पर विकल्प से परसवर्ण होता है)। इस सूत्र से परसवर्ण विकल्प से हो...