अनेक सिद्ध लेखक, प्रसिद्ध संपादक, अनुभवी अनुवादक शब्दों की व्युत्पत्ति संबंधी अज्ञान या अधूरे ज्ञान के कारण आकलन को आँकलन लिखते पाए जाते हैं। सामान्य जन भी गीता में भगवान कृष्ण के वचनों को ध्यान में रखते हुए उन्हें ही श्रेष्ठ आदर्श मानकर अनुकरण करते हैं और शब्दों की ऐसी वर्तनी चल पड़ती है जो भाषा में सही नहीं है। आकलन (estimation, assessment), कलन (calculation) से आ उपसर्ग लगाकर व्युत्पन्न होता है। मूल संस्कृत शब्द कलन (√कल्+ल्युट्) 'जानना, समझना, बोध पाना' से ही काल शब्द बना है। आकलन करना संपूर्ण जाँच-परख करना। 'आँकलन' कोई शब्द नहीं है। कुछ लोग अंक (digit, number) से आँक और आँक से आँकलन, ऐसी व्युत्पत्ति करते हैं, जो भ्रामक है। अंकन तत्सम से आँकना बनेगा, बीच में //ल// कैसे आ जाएगा! समस्या तो आँकलन की है, आँकना की नहीं। असल में कुछ क्षेत्रों में शुद्ध स्वरों को अनुनासिक बनाकर उच्चारण किया जाता है अर्थात नाक से बोला जाता है; जैसे– डाकिया> डाँकिया, पान> पाँन। संभवत: इसीलिए आकलन को भी आँकलन कह दिया जाता है और भ्रमवश उसे शुद्ध मान लिया जाता है। कुल मिलाकर आँकलन भ्राम...
सिख धर्म के तीसरे गुरु, गुरु श्री अमरदास जी का प्रसिद्ध कथन है– "सूरा सो पहचानिए, जो लरै दीन के हेत, न पुरजा-पुरजा कट मरै, कबहुँ न छाँड़ै खेत॥" खेत संस्कृत के क्षेत्र से बना है और बहु-अर्थी शब्द है। संस्कृत में क्षेत्र का अर्थ खेत, भूमि, बाड़ा या मैदान के अतिरिक्त देह , विस्तार, पत्नी आदि भी है। अनेक तीर्थस्थानों को भी क्षेत्र कहा गया है। हिंदी में सामान्यतः हम उस भूमिखंड को खेत कहते हैं जो जोतने-बोने और अन्न, शाक-सब्ज़ी आदि की फसल उगाने के योग्य हो। प्रदेश, इलाका, भूभाग या मंडल भी क्षेत्र कहलाता है। किसी देश या दुनिया का एक विशेष हिस्सा भी क्षेत्र है, जो अपनी भौगोलिक, प्राकृतिक या सांस्कृतिक विशेषताओं के कारण अन्य क्षेत्रों से अलग पहचाना जाता है। विशेषता के अनुसार ही आकार में यह छोटा भी हो सकता है (जैसे- हिंदी भाषी क्षेत्र) और विस्तृत भी (जैसे- यूरोपीय क्षेत्र)। पुराने ज़माने में लड़ाइयाँ विशाल मैदान में आमने-सामने हुआ करती थीं, इसलिए युद्धक्षेत्र, रणक्षेत्र, लड़ाई के मैदान को भी खेत कहा गया। हतौं न खेत खेलाइ खेलाई । तोहि अबहि का करौं बड़ाई । —मानस, ६ । ३४ ।...