उदास गुलाब दिवस 🌹 ••••••• हमें पता है कि यह उत्सव हमारे लिए नहीं है फिर भी जाने क्यों सुबह से गुलाब की प्रतीक्षा थी। नहीं मिलना था, नहीं मिला। गुलाब नहीं मिला तो सोचा आपसे जुलाब के बारे में ही बात क्यों न कर लें। चौंकिएगा नहीं अगर यह कहा जाए कि #गुलाब_और_जुलाब एक ही है! और गुलाब का अर्थ वह भी है जिसे हम गुलाबजल कहते हैं! 🌹🌹 अरबी भाषा में गोल/गुल का अर्थ फूल है। फ़ारसी में फूल के अतिरिक्त एक विशेष फूल 🌹 को भी गुलाब कहा गया। आब' है पानी। तो अपने यहाँ गुल+ आब –> गुलाब से हो गया गुलाब जल। वहीं फ़ारसी में ग को ज हो जाने से गुलाब बन गया जुलाब यानी एक काढ़ा जो अपच (कॉन्स्टिपेशन) में दिया जाता है। आगे चलकर उसे काढ़े को पीकर सुबह होने वाले परिणाम के लिए भी "जुलाब" शब्द चल पड़ा। महक चाहे जैसी हो। इसी जुलाब से अंग्रेजी और कुछ यूरोपीय भाषाओँ में julep शब्द बना। बात तो बड़ी है पर अभी इतना ही। कहीं अपच न हो जाए। 🌹🌹हैप्पी रोज़ डे 🌹🌹
सा विद्या या विमुक्तये ••••• विश्वविद्यालय अनुदान आयोग के आधिकारिक ध्येय वाक्य पर दृष्टि गई– "ज्ञान-विज्ञान विमुक्तये"। बहुत अस्पष्ट और भ्रामक है, और व्याकरण की दृष्टि से अशुद्ध भी। संस्कृत में है, इसलिए कोई कुछ कहेगा भी नहीं, क्योंकि देवभाषा जो ठहरी। जो संस्कृत नहीं जानते उनमें भी संस्कृत के स्पर्श से किसी शब्द को शुद्ध-पवित्र मान लेने की प्रवृत्ति रही है। सर्वोच्च शिक्षा की नियामक संस्था से जुड़ा हुआ है, इसलिए पाठक को मानना पड़ेगा कि ठीक ही होगा। "ज्ञान-विज्ञान विमुक्तये" संस्कृत व्याकरण से सिद्ध नहीं होता, अर्थ भी अटपटा है– ज्ञान-विज्ञान से छुटकारा! यदि हम संस्कृत व्याकरण के अनुसार देखें, तो "ज्ञान-विज्ञान" एक समस्त पद है, जो अपने मूल रूप में है और किसी वाक्य में सीधे प्रयोग नहीं हो सकता। यदि इसे द्वन्द्व समास माना जाए, तो इसका रूप "ज्ञानविज्ञाने विमुक्तये" होना चाहिए। यदि समास समाहार-द्वन्द्व है, अर्थात ज्ञान और विज्ञान दोनों मिलकर मुक्ति के लिए काम कर रहे हैं, तो यह रूप हो सकता है "ज्ञान-विज्ञानं विमुक्तये"। यदि स...