गधा संस्कृत में एक धातु है √गर्द (शोर करना, चीखना-चिल्लाना) उससे अभच् प्रत्यय जुड़कर बनता है गर्दभ। गर्दभ > गधा (गदहा)। एक सीधा-सादा पशु, donkey, ass. लाक्षणिक अर्थ: मूर्ख, भोला, simpleton, stupid. अविश्रामं वहेद्भारं शीतोष्णञ्च न विन्दति ससन्तोषस्तथा नित्यं त्रीणि शिक्षेत गर्दभात्॥ ~चाणक्य "बिना विश्राम किए भार वहन करना, सर्दी-गर्मी की चिंता न करना, सदा संतुष्ट रहना, ये तीन बातें गधे से सीखनी चाहिए।" गधे अनुशासित होते हैं और अपने काम को लेकर बहुत सजग रहते हैं। गधों की याददाश्त बहुत अच्छी होती है, वे रास्तों को आसानी से याद रख सकते हैं। कहते हैं कि रेखागणित का एक प्रमेय गर्दभानंद ने सिद्ध किया था — त्रिभुज की दो भुजाओं से तीसरी छोटी होती है। [चित्र कच्छी गधा (गुजरात), सौजन्य @विकी कॉमंस] गुजरात में दो विशिष्ट नस्लों के गधे मिलते हैं - हलारी गधा और कच्छी गधा। दोनों ही नस्लें गुजरात के पारंपरिक पशुपालन और ग्रामीण अर्थव्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। इनके संरक्षण के लिए विशेष उपाय किए जा रहे हैं। 🫏🫏🫏
मीडिया में प्रायः प्रयुक्त हो रहे "सशक्तिकरण", "तुष्टिकरण" जैसे शब्दों की शुद्धता पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए जब मैंने कहा कि "सशक्तीकरण" और "तुष्टीकरण" ठीक हैं, तो कुछ शंकाएँ आईं, जिनका समाधान करने का प्रयास यहाँ किया जा रहा है। मूल प्रत्यय करण (कृ+ल्युट्) है। करण जुड़ने से पहले संस्कृत व्याकरण के अनुसार आधार शब्द के स्वर में वृद्धि होती है। यह नियम हिंदी व्याकरण से समझने में अड़चन पैदा करता है, विशेषकर जब प्रत्यय अकारांत शब्दों से जुड़ता है; जैसे– सशक्त (विशेषण ) से करण (ई-करण) –> सशक्तीकरण को सीधे शक्ति से जोड़कर सशक्तिकरण किया जाता है। व्यक्तिकरण और तुष्टिकरण भी इसी का परिणाम हैं। विलीनीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण, तुष्टीकरण आदि शब्दों को आप केवल '-करण' जोड़कर उन्हें नहीं समझा सकते जिनकी संस्कृत में पैठ नहीं है। सच यह है कि हिंदी शब्द निर्माण में अनेक बार संस्कृत व्याकरण सहायक नहीं होता। यह स्वाभाविक है क्योंकि हिंदी ने अपनी प्रवृत्ति के अनुसार प्रयोग किए हैं। संस्कृत व्याकरण में ई-करण बनने की प्रक्रिया है- कृ+ल्यप्> करण। जो जैसा न...