॥योगक्षेमं वहाम्यहम्॥ खतरा, risk के लिए हिंदी और बहुत सी भारतीय भाषाओं में प्रयुक्त शब्द जोखम/जोखिम संस्कृत "योगक्षेम" से व्युत्पन्न है।¹ योगक्षेम > जोगखेम > जोखम > जोखिम। योगक्षेम का कोशीय अभिप्राय कल्याण, भलाई, मंगल इत्यादि है। सदियों की यात्रा के बाद जोखम तक पहुँचते-पहुँचते इसके अर्थ में परिवर्तन आ गया है। किंतु अतर्क भी तर्क का ही एक पहलू है, जोखिम में भी योगक्षेम अर्थात सुरक्षा की संभावना को ही तोला जाता है। इस प्रकार इसमें तर्कसंगति का पूर्ण अभाव नहीं कहा जा सकता। जोखिम/जोखिम का अर्थ है ऐसा काम जिसके लिए बहुत अधिक धन-शक्ति तथा साहस की अपेक्षा हो, फिर भी जिसकी सिद्धि अनिश्चित हो। किसी कार्य या व्यापार में घाटे, अनिष्ट या हानि की संभावना जोखिम है। भारतीय जीवन बीमा निगम का ध्येय वाक्य है– "योगक्षेमं वहाम्यहम्" अर्थात आपका कल्याण हमारी जिम्मेदारी है। यह श्लोक भगवद्गीता का है जिसमें भगवान कृष्ण अर्जुन को कहते हैं जो लोग निरंतर मुझ में निवेश करते हैं, मैं उनकी सुरक्षा की गारंटी देता हूँ। राजस्थान में व्यापारियों के सामान के बीमा कार्य के लिए भी कहीं-कहीं...
कुमाउँनी "पैर पड़ण" का अर्थ पैरों पर गिरना नहीं है। भूस्खलन के लिए प्रचलित शब्द पहिरो/पइरो/पैरो (नेपाली), पैर/पैरो (कुमाउँनी) की व्युत्पत्ति संस्कृत "प्रसरः" (बढ़ना , विनाश, बाढ़) से संभव लगती है। आप्टे के अनुसार प्रसर का अर्थ भीषण तूफ़ान, तेज वर्षा, नदी का तीव्र वेग, बाढ़, विनाश आदि भी है। किंतु राल्फ़ टर्नर की व्युत्पत्ति अधिक तर्कसंगत है। उसके अनुसार पैरो (pa’irō), पैर (pa’ir) (कुमाउँनी); पऽइरो pa’irō, पहिरो pahirō (नेपाली) एक ही मूल के हैं। ~धेरै पानी परे पछि पऽइरो पऱ्यो। ~खूब पाणि पड़ीं पछिल पैरो पड़्यो। {हिम पहिरो (नेपाली.), ह्यूँ पैरो (कुमाउँनी) अर्थात् avalanche (हिमस्खलन)} टर्नर के अनुसार: कुमाउँनी/नेपाली पैरो pairo (landslip); -- perh. < संस्कृत pradaráḥ प्रदर (प्र+दर) fissure (गर्त) से व्युत्पन्न है। आप्टे ने 'प्रदर' का अर्थ फटना, दरार, छिद्र, गड्ढा, गर्त, विवर आदि माना है। जैसे वाल्मीकि रामायण में: "इत्युक्त्वा लक्ष्मणं रामः प्रदरः खन्यतामिति। तस्थौ विराधमाक्रम्य कण्ठे पादेन वीर्यवान्।।" वाल्मीकि रामायण, (3.4....