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कथा चीनी और मिसरी की

चीनी का पुराना भारतीय नाम शर्करा/सिता है। पीले-मटमैले रंग की शक्कर को देसी बोलियों में प्रायः सक्कर कहते हैं। शर्करा शब्द ही भारत में शक्कर फ़ारसी/अरबी में शकर से लैटिन, फ्रेंच आदि से होकर अंग्रेजी में शुगर बना। कुछ लोगों को लगता है परिशोधित चीनी के बदले हुए रंग-रूप का साम्य चिकनी (चीनी) मिट्टी से बने सफ़ेद और चमकदार बर्तनों से होने के कारण इसका नामकरण हुआ, जो तर्कसंगत नहीं। गन्ने के रस से शक्कर बनाने की प्रौद्योगिकी में भारत अग्रणी देश था।  गन्ने के रस को परिशोधित करने की कला चीन से पहले भारत से पश्चिम की ओर गई। फ़रात नदी क्षेत्र में 700 ई के आसपास नेस्टोरियन संतों ने गन्ने के रस की अधिक सफाई कर अधिक सफ़ेद चीनी बनाई। यहाँ से पड़ोसी देश मिस्र के कारीगरों ने इसमें और सुधार किया। मिस्र में यह उद्योग खूब फला फूला और उसने इसके बल पर राज शक्ति बढ़ाने की कोशिश की। मिस्र द्वारा शोधित उस रवेदार उत्पाद को भारत में मिसरी (मिस्र की) कहा गया। 7 वीं शताब्दी में यह तकनीक भारत से चीन गई। माना जाता है कि अच्छी चीनी बनाने में निपुण कुछ कारीगरों को कुबलाई खां मिस्र से मंगोलिया ले गया और वहाँ से चीन।...