1. राति ब्यान कुमाउँनी में बहुत सुबह, भोर या तड़के के लिए ब्यान शब्द का प्रयोग किया जाता है। प्रायः इसे हिंदी क्रिया ब्याना (जनना) से व्युत्पन्न मान लिया जाता है। रातिब्यान अर्थात् रात के द्वारा भोर को जनने का समय, मुँह अँधेरे। यों "ब्यान" को हिंदी ब्याना का लाक्षणिक अर्थ माना जा सकता है, इसमें काव्यात्मकता भी है, "रात्रि मानो संतान को जन्म दे रही है और उसके गर्भ से भोर का जन्म हो गया।" किंतु यह भी एक मत हो सकता है कि जब मूल रूप ही अन्य से विकसित हो तो लाक्षणिक प्रयोग सिद्ध करने के लिए अन्यत्र जाना व्यर्थ होगा। ब्यान शब्द हिंदी बिहान से बना हुआ भी हो सकता है जो संस्कृत विहान/विभान से है। √भा धातु से अन्य अनेक शब्द हैं, जैसे - प्रभात, विभा, प्रभा इत्यादि। वि + √भा (चमकना, प्रकाशित होना) + ल्युट् = विभान ➡️ बिहान ➡️ ब्यान। ••• ••• 2. गंगा और गङ् - गाड़ कुमाईं में "गङ्" का अर्थ केवल गंगा नदी नहीं है, यह नदी - सामान्य का पर्याय है! जैसे कालीगङ्, गोरीगङ्, रामगङ्, सरयू गङ्। किसी भी नदी नाम के साथ गङ् जोड़ा जाता है। छोटी और कम पानी वाली नदी को गाड़ कहा जाता है जै...
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