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निपसि RAS


भाषा विज्ञान में एक शब्द है निरर्थक परिवर्णी सिंड्रोम (Redundant Acronym Syndrome - RAS) इसका अर्थ है कथन में ऐसे शब्दों या पदों का दोहराव जिन की आवश्यकता नहीं थी। व्यर्थ पुनरावृति की यह प्रवृत्ति प्रत्येक भाषा में पाई जाती है। हिंदी में इसका एक कारण कोड-परिवर्तन (code switching), एक भाषा के भीतर दूसरी भाषा के शब्द पिरोना, भी है। 
हिंदी में इसके कुछ मनोरंजक उदाहरण दिए जा रहे हैं। दैनंदिन व्यवहार में आपको ऐसे अनेक रोचक उदाहरण मिलेंगे। उन्हें स्मरण कर सकते हैं।
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• कपड़े वाले की दुकान पर सुनाई पड़ता है, "कोई कटपीस का टुकड़ा दिखाइए।"
• दादी माँ समझाती हैं, "बादाम रौग़न का तेल दूध में मिलाकर लिया करो।"
• मास्टर जी डाँटकर कहते हैं, "दुबारा से रिपीट करो।"
• थोड़ी सी भी समझदारी की अकल होती तो झुककर नमन करते। 
• अब वे गुस्से में मुँह फुलाए बैठे हैं।
• अच्छे सज्जन लोग खामोशी से उधर बैठे हैं चुपचाप।
• गंगाजल के पानी की ही तरह आबे ज़मज़म का पानी भी पवित्र माना जाता है।
• ये उदास मायूसी अब बर्दाश्त नहीं होती। 
• गेहूँ का आटा पीस दिया गया।
• गमला बीच सेंटर में रख दीजिए।
• जमना ब्रिज के पुल पर बहुत ट्रैफ़िक था।
• उस पागल का दिमाग खराब हो गया है।
• साफ तौर पर स्पष्ट समझा दिया था।


टिप्पणियाँ

  1. बहुत सुंदर दादा । न्याय दर्शन में तो इसे पुनरुक्ति दोष ही कहा जाता हैं । पर किसी प्रसंग को समझाने के लिए , खासकर विद्यार्थी वर्ग को बार बार एक ही विषय को दोहराना पड़ता हैं । अथवा खुद भी स्मरण करने के लिए बार बार आवृत्ति करनी पड़ती हैं । एक ही बात जोरदारी से कहने के लिए भी बार बार कहना पड़ता हैं । एक बार से व्यक्ति सीरियसली नही लेता हैं। बच्चो को वृद्धों को भी कई बार याद दिलाना पड़ता " दवाई खाओ, दवाई खाओ समय हो गया हैं ।" जिनकी स्मरण शक्ति कमजोर हैं उन्हें भी बार बार याद दिलाना पड़ता हैं । मेरे एक गुरु पीचडी निरीक्षक भी थे और मेंटर भी , उनकी मां बार बार कहती थी , " প্রবাল চান করো চান করো " किंतु वह अपनी ही धुन में किताबे खोज में लगे रहते थे । हमारे लिए बहुत ही उपयोगी और embarrasing होता था ।
    आपके उद्धार अत्यंत रोचक हैं दादा सुप्रभात ।

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