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सौगंध

सौगंद, सौगंध 
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शपथ के लिए एक हिंदी शब्द है "सौंह"।  वीरवल्ली आर जगन्नाथन ("छात्र कोश") तथा कुछ अन्य हिंदी कोश इसे "सौगंध" से व्युत्पन्न मानते हैं किंतु हमारे विचार से यह संस्कृत 'शपथ' से व्युत्पन्न होता है। संस्कृत शपथ, प्राकृत में सवहो/ सवहं हिंदी में सौंह, सौं, सूँ। 

संस्कृत शब्दकोशों में सौगंध शब्द प्राप्त नहीं होता। यदि गंध से  'सु' जोड़कर किसी प्रकार (बलात्) सिद्ध कर भी लें तो गंध/सुगंध का भाव शपथ, कसम में नहीं आता। इसे समरूपी भिन्न मूलक या भ्रामक व्युत्पत्ति का शब्द मान सकते हैं।

यह जानना रोचक होगा कि सौगंध चाहे राम की खाएँ या संविधान की, यह शब्द हिंदी में फ़ारसी से आया है। फ़ारसी में 'सौगंद' है, अर्थ है शपथ, क़सम। बलात् तत्समीकरण की प्रवृत्ति से ढलकर सौगंद ही सौगंध हो गया है। यह बात और है कि इसमें न गंध है, न सुगंध।

संस्कृत में सौगंधिक (सुगन्ध + ठन् + अण्) या सौगन्ध्य (सुगन्धस्य भाव:) जैसे शब्द हैं जिनमें कुछ प्रत्यय जुड़ने पर वृद्धि हो जाती है। इन्हीं के अनुकरण पर हिंदी में सौगंध शब्द सौगंद के लिए गढ़ लिया गया है।

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