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मृत्यु के उपरांत

शब्द विवेक : "मृत्योपरांत" समीक्षा 
'उपरांत' शब्द संस्कृत में नहीं बनता। हिंदी का क्रियाविशेषण है जो उपरि (संस्कृत)> ऊपर (हिंदी) और अंत (संस्कृत) से मिलकर बना है, अर्थ है– के बाद, के अनंतर, तत्पश्चात। हिंदी में किसी घटना, क्रिया का संबंध उसके बाद होने वाली घटना, क्रिया से बताने के लिए योजक क्रियाविशेषण पदबंध के रूप में इसका प्रयोग होता है, और प्राय: किसी शब्द के साथ जुड़कर यौगिक शब्द भी बनाता है; जैसे – 
कथा के उपरांत प्रसाद बँटेगा। 
पिता के निधन के उपरांत उसकी पढ़ाई छूट गई। 
कृषि भूमि के उपरांत गौचर प्रारंभ हो जाती है।

उपरांत के साथ जो यौगिक शब्द बनते हैं, जैसे – तदुपरांत, स्नानोपरांत, पूजनोपरांत आदि, वे भ्रामक रूप से शुद्ध तत्सम लगते हैं, होते नहीं; क्योंकि इनका उत्तरार्ध मुख्य घटक उपरांत ही तत्सम नहीं, तद्भव है। 
जन्मोपरांत, विवाहोपरांत, मरणोपरांत शब्दों का अनुकरण करते हुए अज्ञानवश 'मृत्योपरांत' भी गढ़ लिया गया है, जो असिद्ध है। मृत्यु+उपरांत (उ+उ= ऊ) —> मृत्यूपरांत होगा लेकिन हिंदी में मृत्यूपरांत का चलन नहीं है। 'मृत्यु के उपरांत' अथवा 'मरणोपरांत' कहना अधिक सरल है।

तदोपरांत भी अशुद्ध है। तद्+उपरांत = तदुपरांत होगा।

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