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कचहरी

कचहरी  کَچَہْرِی

‎कचहरी को शब्दसागर ने देशज अथवा संस्कृत कष + गृह = कषगृह > कशघरी > कछहरी > कचहरी । संस्कृत में कष का अर्थ घिसना, परखना, कसना, जाँचना है। इसी से शब्द बना है कष-पट्टिका (कसौटी) कष-पाषाण (शुद्धता जाँचने-परखने का पत्थर)। कसौटी शब्द संस्कृत के कृत्यगृह से व्युत्पन्न भी माना गया है। कृत्य (कर्तव्य) + गृह (घर) > कच्चघरी > कचहरी। संस्कृत कृत्य-गृह का अशोक कालीन प्राकृत में "कच्चघरिका" रूप मिलता है जो अपभ्रंश से हिंदी/उर्दू तक आते-आते कचहरी बन गया।

कचहरी वह स्थान है जहाँ बैठकर न्यायाधिकारी वाद-विवादों पर निर्णय लेते हैं। इसके अन्य अर्थ हैं - दरबार, राज-सभा, न्यायालय, अदालत, इजलास, मजमा आदि। कचहरी से अनेक मुहावरे बने हैं; जैसे कचहरी लगना/लगाना, ~बैठना, ~उठना, भरी~, खुली~, कोर्ट-कचहरी के फेरे।
यह शब्द मुगल, मराठा, दक्षिण के अनेक राजा-रजवाड़ों के कामकाज का प्रमुख शब्द हो गया था। फिर कम्पनी और अंग्रेजी राज में कोर्ट-कचहरी के चक्कर आम हो गए तो लोकप्रियता में कचहरी को अखिल भारतीय शब्द बनना ही था। आज भारत की प्रायः सभी प्रमुख भाषाओं में कचहरी, कचेरी, कच्चेरी प्राप्त होता है।
गुजराती: કચેરી (kacerī)
मराठी: कचेरी (kacerī)
कन्नड़: ಕಛೇರಿ (kachēri)
मलयालम: കച്ചേരി (kaccēri)
तमिल: கச்சேரி (kaccēri)
तेलुगु: కచేరీ (kacērī)
अंग्रेजी: cutcherry

पिछले लगभग एक सौ वर्षों से कच्चेरी (कचहरी) का एक मधुर और मोहक रूप दक्षिण भारत में प्रचलित हुआ है। कर्णाटक संगीत के दिग्गज प्रस्तोता और पारखी किसी हॉल में एकत्र होकर गायन और वादन का जीवंत कार्यक्रम प्रस्तुत करते हैं। इसे भी कच्चेरी (katchery) कहा जाता है जिसे पुनर्जीवित करने का श्रेय आर्यकुडी रामानुज आयंगार को जाता है। इसका संबंध तंजावूर के मराठा शासकों (1670 - 1800) से जुड़ा है।नामकरण का कारणभी यही है कि जिस प्रकार राजा महाराजाओं की कचहरी में जनता की फरियाद की सुनवाई होती थी उसी प्रकार संगीतकार भी संगीत साधना में अपनी उपलब्धियों को राजा और उसकी विद्वत मंडली तथा श्रोताओं के समक्ष सुनवाई के लिए प्रस्तुत करते हैं।


इस प्रकार की कचहरी में नीरस कानूनी दाँवपेंच नहीं, कर्णाटक संगीत के गायन-वादन की सरस संगीत लहरी गूँजती है। उत्तर भारत में इस प्रकार के आयोजन को महफ़िल या संगीत संध्या कहा जाता है जिसमें हिंदुस्तानी संगीत या ग़ज़लों का बोलबाला रहता है किंतु कचहरी केवल कर्णाटक संगीत सभाओं को कहा जाता है।




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