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शब्द चर्चा: साध्वी

साध्वी चर्चा 
आजकल धार्मिक चोले के साथ राजनीति करने वाली अनेक स्त्रियाँ अपने नाम के आगे 'साध्वी' विशेषण जोड़ती हैं। X (पूर्व ट्विटर) पर एक अनुसारक ने पूछा– क्या साध्वी शब्द का संबंध सधवा, विधवा से है? क्या इन शब्दों का मूल एक है?

समाधान में कहना पड़ा– नहीं, ऐसा नहीं है। संस्कृत में 'धव' का अर्थ है पति। विधवा का अर्थ हुआ जिसका 'धव' न हो अर्थात जो पति से रहित हो गई है; और विधवा का विलोम शब्द 'सधवा' अर्थात पति सहित नारी, जिसे सौभाग्यवती भी कहा जाता है। 
साध्वी साधु से बना स्त्रीलिंग (साधु+ ई) सर्वथा भिन्न शब्द है। अमरकोश के अनुसार 'साध्वी' पतिव्रता को कहा जाता है। 

पतिव्रता की व्याख्या अनेक पुराणों, स्मृतियों और कोश ग्रंथों में भिन्न-भिन्न प्रकार से की गई है। आज की भाषा में कहें तो सब परिभाषाओं के पीछे पुरुषवादी दृष्टिकोण है; जैसे हारीत स्मृति की यह परिभाषा देखिए—
"आर्त्तार्त्ते मुदिता हृष्टे प्रोषिता मलिना कृशा।
मृते म्रियेत या पत्यौ साध्वी ज्ञेया पतिव्रता॥"
अर्थात जो स्त्री पति के दुखी होने पर दुखी, सुखी होने पर प्रसन्न, पति के परदेस जाने पर मलिन (फीकी और उदास) तथा कृश (कमज़ोर) हो जाए, और पति की मृत्यु पर जो स्वयं भी प्राण त्याग दे, वही सच्ची पतिव्रता या साध्वी है!

अब आप ही तय कीजिए कि इस कसौटी पर आधुनिक साध्वियों की समानता परंपरा प्राप्त साध्वी शब्द के साथ कैसे स्थापित की जा सकती है!

रही बात नाम के साथ साध्वी विशेषण लगाने की, तो यह या तो नामधारी की व्यक्तिगत इच्छा है या उसके समर्थकों और अनुयायियों की। दोनों ही स्थितियों में हम केवल शब्द का विमर्श कर सकते हैं, किसी को उचित-अनुचित नहीं ठहरा सकते।
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