खी-खी के बहाने
हाहा-हूहू, ही-ही या खी-खी के बहाने किसी की खिल्ली उड़ाना ठीक नहीं। हिंदी में ये सभी विस्मय, आनंद, आमोद आदि मनोभावों को बताने वाले अव्यय हैं। इनका व्यावहारिक प्रयोग और उचित संदर्भ समझ लेना ज़रूरी है।
अमरकोश के अनुसार "हाहा हूहू" गंधर्वों को कहा जाता है जो देवयोनि में माने जाते हैं। वे अपने क्रियाकलापों से देवताओं को प्रसन्न रखते हैं।
"हाहा हूहूश्चैवमाद्या गन्धर्वास्त्रिदिवौकसाम्।"
~अमरकोश
'हा-हा' पीड़ा, शोक या आश्चर्य का प्रकट करने वाला उद्गार है।
हिंदी शब्दकोशों के अनुसार हाहा-हूहू ऊधम बाज़ी, हो-हल्ला, शोरगुल को व्यक्त करता है। हा-हा उन्मुक्त अट्टहास के लिए भी है तथा शोक और कष्ट व्यक्त करने के लिए भी।
'ही-ही' भी अव्यय है। आप्टे के अनुसार ही+ही आश्चर्य और प्रमोद को प्रकट करने वाला अव्यय है।
रही बात खी-खी की। यह अनुकरणात्मक शब्द है जो हँसने की विशेष रूप से अप्रिय और चुभने वाली आवाज़ का संकेत करता है। 'खि' और 'खी' से अर्थ संकेत में बड़ा अंतर आया है। जैसे खिलखिलाना, खिलखिलाहट (कुमाउँनी में खितखिताट) में त्वरित और उन्मुक्त होकर हँसने का भाव है, और यह दोनों पक्षों (वक्ता-श्रोता) को आनंद देने वाली अभिव्यक्ति है, लेकिन खी-खी करना में अकारण और अनुचित हँसने का भाव है, जो अशिष्ट और मूर्खतापूर्ण समझा जाता है। इसमें आनंद, यदि हो तो, केवल हँसने वाले के पक्ष में है, सुनने वाले के लिए नहीं। सामाजिक व्यवहार में इसे निर्लज्जता पूर्ण माना जाता है। उदाहरण देखिए–
~ हर समय खी-खी करने की आदत अच्छी नहीं।
`~ अधिकारी के डाँटने पर भी वह केवल खी-खी करता रहा।
और हाँ, बंदर के बोलने के लिए भी लोक में खी-खी शब्द है!
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जी बिल्कुल । हमारे पिताजी अक्सर ऐसा कहकर डांटते थे - क्या हाहा हुहू लगा रखा है । चुप करो या खी खी कर हँसना बंद करो आदि । गंधर्व का संबंध जैसी जानकारी के लिए धन्यवाद |
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