धाँसू और घोंचू
मुंबइया हिंदी में बढ़िया के लिए प्रचलित हैं - झकास / धाँसू / कड़क / ढिंचेक / रापचिक।
इनमें "धाँसू" की अर्थ छबियाँ बहुत हैं। यह बढ़िया, शानदार, आकर्षक, तड़क-भड़क वाला, बलिष्ठ, तगड़ा गज़ब का, अनुपम आदि अर्थों में प्रयुक्त होता है। अंग्रेजी में great/wonderful/brilliant/gorgeous/stunning/super/formidable इत्यादि के लिए विशेषकर युवा पीढ़ी द्वारा प्रयोग किया जाता है।
***
"घोंचू" देशज (अज्ञात व्युत्पत्तिक) शब्द है जिसका अर्थ है निपट मूर्ख, नासमझ। घोंचा (बैल) से बना विशेषण है घोंचू।
मूर्ख को लक्षणा में गधा या बैल के रूपक से संकेत किया जाता है। संस्कृत में प्रसिद्ध उक्ति है "गौर्वाहीकः"। अर्थात् वाहीक देश के लोग बैल होते हैं।
किन्हीं सज्जन की एक फ़ेसबुक पोस्ट पर ट्विटर और फ़ेसबुक पर बड़ी रोचक चर्चा हुई जिसमें कहा गया है कि "धोबी का कुत्ता घर का न घाट का" कहावत में कुत्ता नहीं, "कुतका" का प्रयोग सही है। यह लोकोक्ति सदियों से ब्रजभाषा, अवधी, भोजपुरी, बुंदेली, नेपाली, कुमाउँनी सहित अनेक अन्य भाषाओं में बहुत पहले से उपस्थित है। 15-वीं सदी के संत कवि गोस्वामी तुलसीदास ने कवितावली में इसका प्रयोग मिलता है। इसका आशय ऐसे व्यक्ति से है जो एक ठिकाने पर जमकर कोई काम नहीं करता । बेकार उधर फिरनेवाला । निकम्मा आदमी। कहावत का कुत्ता घर का इसलिए नहीं कि आमतौर पर कुत्ते का काम होता है घर की रखवाली करना। जब घाट पर जाएगा, तो रखवाली कौन करेगा। घाट का इसलिए नहीं कि वहाँ उसके करने का कोई काम नहीं और आखिर वहाँ से भी धोबी के साथ लौट ही आएगा। इस लोकोक्ति का एक छोटा रूप भी हिन्दी में चलता है - घर का न घाट का। अंग्रेजी में इसके समकक्ष कहावत है: Whistling maids and crowning hen, are neither fit for gods, nor for men! "कुतका" हिन्दी में एक बैटनुमा मोटा डंडा या सोंटा है जो कपड़े को धोने के दौरा...
सुन्दर सराहनीय जानकारी 🙏🏻
जवाब देंहटाएंधन्यवाद।
हटाएं