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बादाम कथा

बादाम, एक तरह का मेवा, भूमध्यसागरीय जलवायु का पेड़ है और मूलतः ईरान और उसके आसपास के देशों की वनस्पति है। यह जंगली वृक्ष था और सबसे पहले पालतू बना लिए जाने वाले पेड़ों में इसकी गिनती होती है। माना जाता है कि लगभग 3000 से 2000 ईस्वी पूर्व में इसे पालतू बनाकर उगाया जाने लगा था।
जहाँ तक बादाम शब्द की व्युत्पत्ति का प्रश्न है, यह ईरान की पहलवी भाषा में वादाम wādām / वुदाम wudām (अर्थात बादाम का पेड़ या फल) से बताई गई है। यही वाताम फ़ारसी में बादाम बन गया। फ़ारसी में बादाम होने के कारण बहुत से लोग इसे /बा-/ उपसर्ग से बना शब्द मानते हैं, क्योंकि हिंदी-उर्दू में बा- उपसर्ग वाले बहुत से शब्द प्रचलित हैं, इसलिए बा+दाम अर्थात दाम (मूल्य) वाला, मूल्यवान फल। यह व्युत्पत्ति भ्रामक है। 
संस्कृत में इसी वादाम से वाताम या वाताद शब्द आया जान पड़ता है। पहलवी वादाम से ध्वनि साम्य के कारण और वात रोगों में लाभदायक होने के कारण इसको वाताम कहा गया और वात रोग की चिकित्सा से जोड़कर वाताद (वाताय वातनिवृत्तये अद्यते इति, अद् + घञ्) । नहीं लगता कि संस्कृत वाताम से यह शब्द ईरान में जाकर वादाम बना गया होगा क्योंकि भावप्रकाश आदि कुछ आयुर्वेद की पुस्तकों को छोड़कर वाताम अन्यत्र कहीं नहीं है। 
हिन्दी, मराठी, गुजराती, बांग्ला, तेलुगू कनाडा मलयालम आदि में इसे बादाम/बदाम ही कहा जाता है। तमिल में यह பாதம் கொட்டை (बादम कोट्टै) है किंतु बादाम भी कहा जाता है।
कश्मीर ने बादाम को अपना राज्य पेड़ माना है। 

 

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