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कुमाउँनी में वर्षा से संबंधित अभिव्यक्तियाँ

हिंदी में 'बादल फटना' शब्द अंग्रेजी के Cloud burst का शाब्दिक अनुवाद है। बादल फटने के लिए कुमाउँनी में एक मौलिक शब्द है, "पन्यौ बान" पड़ना। बान (<वाण) का एक स्थानीय अर्थ है आकाशीय बिजली, वज्रपात। पन्यौ बान अर्थात् पानी वाला वज्रपात। इसमें अचानक किसी छोटे क्षेत्र में भीषण वर्षा होती है जो वज्रपात से कम विनाशक नहीं होती, जैसे 2013 की केदारनाथ त्रासदी। ऐसी धारासार वर्षा होती है कि लगता है जैसे बादलों के थैले का मुँह अचानक खुल पड़ा हो। सारी वर्षा एक ही जगह ऐसे गिरती है जैसे अनाज के बोरे को उलटा जा रहा है। इस विनाशकारी वर्षा के लिए लोक ने बहुत सार्थक, सटीक नाम चुना है : "पन्यौ बान" अर्थात् पानी वाला वज्रपात। 
कुमाउँनी में वर्षा से संबंधित कुछ अन्य अभिव्यक्तियाँ इस प्रकार हैं--
बर्ख लागण (वर्षा प्रारंभ होना)
द्यो लागण (द्यो< सं. देव:=वर्षा)
झमझमाट हुण (हल्की वर्षा)
झड़ पड़ण (कुछ दिन निरंतर वर्षा)
तौड़ाट पड़ण (बड़ी बूँदों वाली तेज वर्षा)
अनेश-मनेश हुण (वर्षा के बादलों से अंधकार होना)
गाड़-खाड़ हुण (वर्षा से नदी नालों का भर जाना)
भुम्क फुटण (वर्षा से भूमिगत जल के सोते फूटना)
सतझड़ (सात दिन तक निरंतर वर्षा)
घम द्यो (धूप के साथ-साथ वर्षा)
उड़न छिट (उड़ती-तैरती बूँदें)
भिजौ बर्ख (धीरे-धीरे बरसकर धरती को तर रखने वाली वर्षा)
द्यो त्वीण (=वर्षा का गर्भपात होना अर्थात् असमय बरसात समाप्त हो जाना)
द्वी/चार आङुल बर्ख (जुते हुए खेत की मिट्टी को दो/चार अंगुल गहराई तक गीला करने वाली वर्षा)।

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