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सशक्तीकरण, तुष्टीकरण और नामकरण


मीडिया में प्रायः प्रयुक्त हो रहे "सशक्तिकरण", "तुष्टिकरण" जैसे शब्दों की शुद्धता पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए जब मैंने कहा कि "सशक्तीकरण" और "तुष्टीकरण" ठीक हैं, तो कुछ शंकाएँ आईं, जिनका समाधान करने का प्रयास यहाँ किया जा रहा है।

मूल प्रत्यय करण (कृ+ल्युट्) है। करण जुड़ने से पहले संस्कृत व्याकरण के अनुसार आधार शब्द के स्वर में वृद्धि होती है। यह नियम हिंदी व्याकरण से समझने में अड़चन पैदा करता है, विशेषकर जब प्रत्यय अकारांत शब्दों से जुड़ता है; जैसे– सशक्त (विशेषण ) से करण (ई-करण) –> सशक्तीकरण को सीधे शक्ति से जोड़कर सशक्तिकरण किया जाता है। व्यक्तिकरण और तुष्टिकरण भी इसी का परिणाम हैं।

विलीनीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण, तुष्टीकरण आदि शब्दों को आप केवल '-करण' जोड़कर उन्हें नहीं समझा सकते जिनकी संस्कृत में पैठ नहीं है। सच यह है कि हिंदी शब्द निर्माण में अनेक बार संस्कृत व्याकरण सहायक नहीं होता। यह स्वाभाविक है क्योंकि हिंदी ने अपनी प्रवृत्ति के अनुसार प्रयोग किए हैं।

संस्कृत व्याकरण में ई-करण बनने की प्रक्रिया है- कृ+ल्यप्> करण। जो जैसा नहीं है, उसे वैसा करने को कृ + च्वि प्रत्यय। च्वि का लोप। कृ से पहले शब्द का अ स्वर > ई। उदार + च्वि + कृ + ल्यप् = उदारीकरण। हिंदी में इतनी जटिल प्रक्रिया कोई कैसे समझे और क्यों समझे? इसलिए रेडीमेड '-ईकरण' प्रत्यय मान लेना चाहिए।

दूसरी बात यह कि अब करण/ई-करण केवल तत्सम शब्दों से ही नहीं जुड़ता। तत्समेतर शब्दों से भी चौड़ीकरण, डामरीकरण, मरम्मतीकरण, सफेदीकरण जैसे शब्द बन रहे हैं और चलन में आ रहे हैं जो संज्ञा से भी बन रहे हैं और विशेषणों से भी। इसलिए हिंदी में 'ई' को करण प्रत्यय का अंग मान लेना चाहिए। समझने-समझाने के लिए "-ईकरण" प्रत्यय मानना तर्कसंगत लगता है।

व्यक्तिकरण नहीं होगा क्योंकि व्यक्ति संज्ञा है, विशेषण नहीं। पहले व्यक्ति से विशेषण बनाएँगे वैयक्तिक, और तभी ईकरण जोड़कर शब्द बनेगा वैयक्तिकीकरण।

नामकरण भिन्न है। नामकरण में ईकरण नहीं है, नामीकरण नहीं होगा। ईकरण प्रायः विशेषण के साथ जुड़ता है; नाम, नाम (संज्ञा) है। इसलिए "-ईकरण" नहीं, केवल करण; करणे ल्युट्, क्रियतेऽनेन ।
[नाम + √कृ + ल्युट् (प्रत्यय)– करण, नाम्न: करणम्।]

हिंदी समझने और बरतने के लिए संस्कृत व्याकरण की बारीकियों को जानना आवश्यक नहीं, लेकिन उतना समझ लेना चाहिए जितना हिंदी को बरतने, व्यवहार में लाने के लिए आवश्यक हो। 
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