बोलने में शब्दांशों, शब्दों या रूपिमों के बीच की ध्वन्यात्मक सीमा निकटस्थ ध्वनि से मिल जाती है। यह पाणिनीय नियमों से इतर एक प्रकार की संधि है जिसे आंतरिक संगम (इंटर्नल जंक्चर) कहा जाता है।
यह प्रकार्य प्रायः आसन्न ध्वनियों के मेल से उच्चारण परिवर्तन (संस्वनिक भिन्नता) के रूप में प्रकट होता है।
उदाहरण>>
अंग्रेजी
~ That's tough —>That stuff
~ night rate —> nitrate
~ do not know –> don't know—> dunno
हिंदी
~ मत जा —> मज्जा
~ गया नहीं —> ग्यानी —> ज्ञानी
तुम हारे —> तुम्हारे
कुमाउँनी
~ बहू राणि —> बौराणि
बहू रानी ज्यू —> बौरानि ज्यू—> बौरन्यू
~ जाण रह् (पुल्लिंग ए.व.) —> जाणरौ
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