दुहाई
[द्वि–> दो–> दु, + आह्वान (बुलाना, टेरना) –> हाई = दुहाई]।
अथवा
[दु (दो)> दुह (जैसे दुहाजू में) + आई प्रत्यय, (जैसे- इकाई, दहाई, तिहाई, चौथाई में)]
प्रयोग के अनुसार अर्थ है– दो बार पुकारना, घोषणा करना, जैसे– बचाओ-बचाओ, रक्षा करो - रक्षा करो, जय हो-जय हो की दुहरी पुकार।
घोषणा होना, डंका पीटना, मुनादी करना भी दुहाई का अर्थ है।
बैठे राम राजसिंहासन जग में फिरी दुहाई ।
संकट या आपत्ति आने पर रक्षा के लिये पुकारना; जैसे बचाओ, बचाओ! त्राहि माम्, त्राहि माम्। अपने बचाव के लिये किसी का नाम लेकर पुकारना।
दुहाई एक प्रकार से दया/न्याय की अपील भी है।
दुहाई का एक अर्थ शपथ या सौगंद भी है।
राम दुहाई (राम की कसम)।
नाथ सपथ पितु चरन दुहाई ।
भयउ न भुवन भरत सम भाई॥
—तुलसी
दुहना क्रिया से भाववाचक संज्ञा भी बनती है दुहाई, अर्थात् दुहने का भाव, दोहन।
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