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आकलन या आँकलन

अनेक सिद्ध लेखक, प्रसिद्ध 
संपादक, अनुभवी अनुवादक शब्दों की व्युत्पत्ति संबंधी अज्ञान या अधूरे ज्ञान के कारण आकलन को आँकलन लिखते पाए जाते हैं। सामान्य जन भी गीता में भगवान कृष्ण के वचनों को ध्यान में रखते हुए उन्हें ही श्रेष्ठ आदर्श मानकर अनुकरण करते हैं और शब्दों की ऐसी वर्तनी चल पड़ती है जो भाषा में सही नहीं है। 

आकलन (estimation, assessment), कलन (calculation) से आ उपसर्ग लगाकर व्युत्पन्न होता है। मूल संस्कृत शब्द कलन (√कल्+ल्युट्) 'जानना, समझना, बोध पाना' से ही काल शब्द बना है।

आकलन करना संपूर्ण जाँच-परख करना।
'आँकलन' कोई शब्द नहीं है। कुछ लोग अंक (digit, number) से आँक और आँक से आँकलन, ऐसी व्युत्पत्ति करते हैं, जो भ्रामक है। अंकन तत्सम से आँकना बनेगा, बीच में //ल// कैसे आ जाएगा! समस्या तो आँकलन की है, आँकना की नहीं।

असल में कुछ क्षेत्रों में शुद्ध स्वरों को अनुनासिक बनाकर उच्चारण किया जाता है अर्थात नाक से बोला जाता है; जैसे– डाकिया> डाँकिया, पान> पाँन। संभवत: इसीलिए आकलन को भी आँकलन कह दिया जाता है और भ्रमवश उसे शुद्ध मान लिया जाता है।

कुल मिलाकर आँकलन भ्रामक व्युत्पत्ति का उदाहरण है। शुद्ध वर्तनी है – आकलन।
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