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बिंदास कथा …!


आइपीएल ने सत्र 2026 के लिए नारा दिया है– "जब मौका हो ख़ास, खेलो बिंदास!

एक मित्र ने पूछा है– यह बिंदास शब्द कहाँ से आया? बना कैसे? 

प्रत्येक शब्द की उत्पत्ति के लिए संस्कृत की ओर मुड़ने वाले लोग तो बिंदास को संस्कृत के "विना + दास्य" शब्द से जोड़ते हैं; दास + प्यञ्! दास्य शब्द का अर्थ है दासता, गुलामी, सेवा, अधीनता। इसके अभाव के अर्थ में बिंदास का प्रयोग कहीं देखा नहीं गया।

आमतौर पर माना जाता है कि बिंदास मराठी से हिंदी में आया। यह मत तर्कसंगत भी लगता है। एक ज़माना था जब बोलचाल की हिंदी और अनेक बोलियों-भाषाओं के शब्द फ़िल्म नगरी से होकर आया करते थे। तब फ़िल्मों की भाषा भी बोलचाल की हिंदी, (उर्दू-हिंदी) हुआ करती थी। अब तो आप जानते हैं फ़िल्में अंग्रेजी के साथ-साथ गाली-गलौज तक निस्संकोच परोस रही हैं और बिंदास परोस रही हैं।

तो आइए, हम भी बिंदास होकर बिंदास की बात करें।

बिंदास की उत्पत्ति खोजने के लिए हमें अरबी तक जाना पड़ेगा। अरबी में एक शब्द है– 'दहशत', जिसका अर्थ है ख़ौफ़, डर, भय, आतंक, टेरर। इसीलिए आजकल टेरेरिस्टों को दहशतगर्द कहा जाता है।
दहशतगर्द ने जब दहशत फैलाई तो लोग डरे। जो नहीं डरे, उन्हें कहा गया बिना दहशत। बिना दहशत सिकुड़ कर बन गया- बिनदहशत। 

मराठी लोक में दहशत से बने धास्त, धास्ती (भीति, डर)। 

हिंदी की ही भांति मराठी में भी राहित्य (न होने) के अर्थ में बिना, बिन उपसर्ग लगते हैं; जैसे बिनपगार, बिनचूक, बिनवसूली, बिनतकरार; ऐसे ही बिनधास्त (बेख़ौफ़), जो अंततः बन गया बिंदास– निश्चिंत, निडर, उन्मुक्त, बंधनहीन। समय के साथ-साथ अर्थ विस्तार से बिंदास में यह भी शामिल हो गया – संकोच न करने वाला, जो पुराने रीति-रिवाज़ों तथा समाज की मान्यताओं को न मानता हो। 

इस प्रकार बिंदास का विकास मार्ग कुछ इस तरह होगा। दहशत (अरबी)–> धास्त। बिना दहशत –> बिनधास्त –> बिंधास–> बिंदास।
 [ऑक्सफोर्ड लर्नर डिक्शनरी के अनुसार bindaas का अर्थ है independent and seeming to have no worries or responsibilities.]
***
तो जैसा कि प्रारंभ में कहा गया TATA IPL 2026 का आधिकारिक प्रचार नारा (कैंपेन स्लोगन) और टैगलाइन है– "जब मौक़ा हो ख़ास, तो खेलो बिंदास"। इसका भाव है — जब कोई विशेष अवसर मिले, तो बिना किसी डर या झिझक के खुलकर खेलो, पूरी मस्ती और आत्मविश्वास के साथ खेलो। इसका पूरा कॉन्सेप्ट विशेषकर युवाओं (और सामान्य रूप से हर क्रिकेट प्रेमी) को बिना डर के, पूरी मस्ती और आत्मविश्वास के साथ अवसर का लाभ उठाने के लिए प्रेरित करना है। जब जीवन में कोई खास मौका आए, तो झिझक मत दिखाओ, पूरी तैयारी और जोश के साथ आगे बढ़ो। सफलता के मार्ग में कोई डर, कोई संकोच रास्ते की बाधा न बने।

इसलिए, खेलो बिंदास...!

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