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मई, 2026 की पोस्ट दिखाई जा रही हैं

सशक्तीकरण, तुष्टीकरण और नामकरण

मीडिया में प्रायः प्रयुक्त हो रहे "सशक्तिकरण", "तुष्टिकरण" जैसे शब्दों की शुद्धता पर प्रश्न चिह्न लगाते हुए जब मैंने कहा कि "सशक्तीकरण" और "तुष्टीकरण" ठीक हैं, तो कुछ शंकाएँ आईं, जिनका समाधान करने का प्रयास यहाँ किया जा रहा है। मूल प्रत्यय करण (कृ+ल्युट्) है। करण जुड़ने से पहले संस्कृत व्याकरण के अनुसार आधार शब्द के स्वर में वृद्धि होती है। यह नियम हिंदी व्याकरण से समझने में अड़चन पैदा करता है, विशेषकर जब प्रत्यय अकारांत शब्दों से जुड़ता है; जैसे– सशक्त (विशेषण ) से करण (ई-करण) –> सशक्तीकरण को सीधे शक्ति से जोड़कर सशक्तिकरण किया जाता है। व्यक्तिकरण और तुष्टिकरण भी इसी का परिणाम हैं। विलीनीकरण, उदारीकरण, वैश्वीकरण, तुष्टीकरण आदि शब्दों को आप केवल '-करण' जोड़कर उन्हें नहीं समझा सकते जिनकी संस्कृत में पैठ नहीं है। सच यह है कि हिंदी शब्द निर्माण में अनेक बार संस्कृत व्याकरण सहायक नहीं होता। यह स्वाभाविक है क्योंकि हिंदी ने अपनी प्रवृत्ति के अनुसार प्रयोग किए हैं। संस्कृत व्याकरण में ई-करण बनने की प्रक्रिया है- कृ+ल्यप्> करण। जो जैसा न...

उत्तराखंड के कुछ तीर्थ नाम जो व्याकरण सिद्ध नहीं, लोक सिद्ध हैं

भाषा के मामले में एक सिद्धांत यह भी है कि जो लोक मान ले, वही शुद्ध। लोकमान्यता का अर्थ यह नहीं है कि मैं आज एक शब्द बना लूँ और कल लोग उसे मानने लगें। लोकमान्यता में सैकड़ों वर्ष लग सकते हैं। व्युत्पत्ति या व्याकरण की दृष्टि से उत्तराखंड के ये पवित्र तीर्थ-नाम अशुद्ध हैं, लेकिन अब लोक स्वीकृत हैं– गंगोत्री/गंगोत्तरी – इनका न तो उत्तर-दक्षिण से कुछ लेना-देना है, न उत्तरीय वस्त्र से। पौराणिक कथा के अनुसार गंगा (भागीरथी) का शिव की जटाओं से भूमि पर उतरना है "गंगावतरण।" जिस स्थान पर गंगा का अवतरण हुआ वह गंगावतरणी। गंगावतरणी से> गंगावतरी> गंगोत्तरी> गंगोत्री। लोक ने अवतरी को "उतरी"  मानकर पुनः संधि पद बना दिया – गंगा + उतरी= गंगोतरी। व्याकरण में यह संधि संभव नहीं, लोक का अपना तर्क होता है।   यमुनोत्री/यमुनोत्तरी को सीधे ही गंगोत्री/गंगोत्तरी के अनुकरण पर बना लिया गया है और उसी की भाँति सौ टका शुद्ध माना जाता है। बद्रीनाथ – बदर, बदरी बेर के फल को कहा जाता है। एक पुराण कथा के अनुसार भगवान विष्णु यहाँ बदरी वन, बद्रिकाश्रम में तपस्या में लीन थे तो उन्हें हिमपात ...

कढ़ी

कढ़ी एक लोकप्रिय और पारंपरिक भारतीय व्यंजन है, जिसे मुख्य रूप से बेसन, दही या छाछ और विभिन्न मसालों के साथ पकाकर तैयार किया जाता है। कढ़ी पकाने की विधि सरल होने और इसके तीखे और चटपटे स्वाद के कारण यह बहुत लोकप्रिय व्यंजन है। (फोटो साभार: विकीपीडिया) कढ़ी की व्युत्पत्ति बड़ी रोचक है। इसका संबंध वैद्यक वाले काढ़े से है। संस्कृत में √क्वथ् धातु का अर्थ है उबालकर गाढ़ा करना। क्वथ् से ही बनता है 'क्वाथ' (काढ़ा, डिकॉक्शन)। क्वथ् से क्त प्रत्यय जोड़कर कृदंत विशेषण क्वथित– (उबालकर गाढ़ा किया हुआ)। संस्कृत क्वथित > प्राकृत कढित> कढ़िय> हिंदी कढ़ी। नेपाली और कुमाउँनी में ढ़ को ड़ बोलने से 'कड़ी'। कुमाऊँ में कहीं-कहीं 'कढ़ी' ('कड़ी') को ग्राम्य अपशब्द (टैबू) माना जाता है, इसलिए इसे वैकल्पिक नाम दिए गए हैं – झोली (झोई) और पयो! झोली, झोल (अर्थात् रस, तरी, ग्रेवी) से है और पयो संस्कृत पय से (√पीङ्, पीयते यत्, जिसे पिया जाए)। हिंदी में प्रचलित कढ़ी से जुड़े कुछ प्रमुख मुहावरे और उनके अर्थ नीचे दिए गए हैं: * कढ़ी का सा उबाल: इसका अर्थ है ऐसा जोश, क्...

कड़ाही, कढ़ाई और कड़ाई

शब्द विवेक #साधो_शब्दविचारो  कड़ाही, कड़ाई, कढ़ाई 🧿 कड़ाही – सं कटाह> प्रा कडाह > हिं कड़ाह> स्त्रीलिंग कड़ाही। *लोहे की कड़ाही। *जलेबी की कड़ाही। 🧿 कढ़ाई– काढ़ना क्रिया का भाव —> कढ़ाई।  कपड़े पर सुई-धागे से की जाने वाली सजावटी सिलाई। * लखनऊ का 'चिकन वर्क' एक प्रकार की कढ़ाई है। मूल शब्द न जानने के कारण 'कड़ाही' को भी 'कढ़ाई' कहा जाने लगा है। जैसे–कढ़ाई पनीर (पनीर के टुकड़ों पर कढ़ाई का डिज़ाइन ज़रूर देखिएगा!) 🧿कड़ाई – सं कड्ड (कठोर, कर्कश) से हिंदी विशेषण कड़ा, कड़ा होने का भाव कड़ाई। * कड़ाई से पेश आना।