धूमपान या धूम्रपान?
सुप्रसिद्ध भाषा वैज्ञानिक देवेंद्रनाथ शर्मा जी ने अपने एक ललित निबंध में कहा है कि स्मोकिंग के लिए धूमपान शब्द है, धूम्रपान नहीं। विचार करें।
धूम (धुआँ) संज्ञा है, धूम्र (धुँए-सा रंग, grey) विशेषण। धुँए का पान किया जाता है, धूमल रंग का नहीं। महर्षि चरक, सुश्रुत आदि आयुर्वेद विशेषज्ञों ने अनेक प्रकार की जड़ी बूटियों के धूमपान का उल्लेख किया है-
"शोफद्रावरुजायुक्तान् धूमपानैर्विशोधयेत्” (सुश्रुत)
इसलिए देवेंद्रनाथ शर्मा जी का कथन कि धूमपान शुद्ध है, तर्कसंगत है; किंतु आज स्मोकिंग के लिए "धूम्रपान" ही रूढ़ हो गया है। अर्थ यात्रा में शब्द रथ बहुत आगे निकल आया है, उसे पीछे मोड़ना संभव नहीं, स्वीकारना होगा। हिंदी ने अपने अनेक नए शब्द बनाए हैं, उनमें एक धूम्रपान भी है। हिंदी में ही नहीं, अन्य भारतीय भाषाओं में भी धूम्रपान बहुप्रचलित है।
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